भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनने की ओर, 2035 तक 200 अरब डॉलर के बाजार का लक्ष्य
नई दिल्ली, 15 जुलाई 2026: भारत तेजी से वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। केंद्र सरकार के सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम 2.0 के तहत देश अब केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डिजाइन, अनुसंधान, उन्नत पैकेजिंग, उपकरण, विशेष सामग्री और कुशल मानव संसाधन सहित पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2035 तक 200 अरब डॉलर के घरेलू सेमीकंडक्टर बाजार का निर्माण करना है।
सेमीकंडक्टर आधुनिक तकनीक की रीढ़ हैं। स्मार्टफोन, डिजिटल भुगतान, इलेक्ट्रिक वाहन, चिकित्सा उपकरण, 5जी नेटवर्क, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और अंतरिक्ष तकनीक जैसे लगभग सभी आधुनिक उपकरणों में इनका उपयोग होता है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती मांग के बीच भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
छह राज्यों में 12 परियोजनाओं को मंजूरी
सरकार ने गुजरात, उत्तर प्रदेश, पंजाब, असम, ओडिशा और आंध्र प्रदेश सहित छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें से तीन संयंत्रों में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है, जबकि दो अन्य इकाइयों में इस वर्ष के अंत तक उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में ऐतिहासिक वृद्धि
पिछले 11 वर्षों में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में 7 गुना वृद्धि
- इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 11 गुना वृद्धि
- मोबाइल फोन उत्पादन में 32 गुना वृद्धि
- मोबाइल फोन निर्यात में 165 गुना वृद्धि
भारत वर्तमान में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है, जिसने सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए मजबूत आधार तैयार किया है।
रोजगार और महिला भागीदारी में बढ़ोतरी
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र ने पिछले एक दशक में लगभग 25 लाख रोजगार सृजित किए हैं। इस उद्योग में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। मोबाइल निर्माण क्षेत्र में प्रत्यक्ष कार्यबल का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा महिलाएं हैं, जबकि पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी लगभग 30 प्रतिशत है।
डिजाइन और अनुसंधान पर विशेष जोर
भारत केवल चिप निर्माण ही नहीं बल्कि सेमीकंडक्टर डिजाइन में भी वैश्विक नेतृत्व स्थापित कर रहा है। दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत सेमीकंडक्टर डिजाइन प्रतिभा भारत में मौजूद है।
डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना के तहत—
- 103 EDA टूल्स के आवेदन स्वीकृत
- 24 चिप डिजाइन परियोजनाओं को मंजूरी
- 15 कंपनियों को वेंचर कैपिटल सहायता
- छात्रों द्वारा 175 सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन विकसित
इसके अलावा Chip to Startup (C2S) पहल के तहत 320 शैक्षणिक संस्थानों में EDA टूल्स स्थापित किए गए हैं और 68,000 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षित किया गया है।
सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम 2.0 से मिलेगा नया विस्तार
सरकार का नया कार्यक्रम छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—
- चिप डिजाइन
- सेमीकंडक्टर उपकरण एवं सामग्री
- निर्माण सुविधाएं
- उन्नत पैकेजिंग
- अनुसंधान एवं विकास
- प्रतिभा विकास
इस पहल से भारत में स्थानीय विनिर्माण, MSME क्षेत्र, वैश्विक निवेश और रोजगार के नए अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
वैश्विक कंपनियों का बढ़ता भरोसा
भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए अमेरिका, जापान, सिंगापुर, जर्मनी, नीदरलैंड और यूरोपीय संघ सहित कई देशों के साथ तकनीकी सहयोग बढ़ रहा है। वहीं Applied Materials, AMD, Lam Research, KLA और Microchip Technology जैसी वैश्विक कंपनियां भी भारत में निवेश और साझेदारी की घोषणा कर चुकी हैं।
भारत का लक्ष्य
सरकार का मानना है कि Semicon India Programme 2.0 भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर हब बनाने, तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने, उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार सृजित करने और 'विकसित भारत' के लक्ष्य को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आने वाले वर्षों में भारत संपूर्ण सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
